रब मेरा

तू है मेरे दिन की रौशनी
तुझसे ही है
मेरी रातों का अँधेरा
तू ही है रब मेरा।
तेरे आगोश में खोया रहूं
तेरे सपनो में सोया रहू
तू नही तो क्या हुआ
तू है मेरे रब जैसा
रब भी तो मुझे मुक्कमल न हुआ
करता हु उसकी इबादत जैसे
वैसे ही तेरी मैं करू।
एक पल में सौ दफा
तेरे संग जियूँ
और हज़ारों दफा
तेरे बिन मरुँ।।
उड़ती बैठती तितलियों में
 तुझे देखा कई दफा
किया उसने मुझसे
सिर्फ एक ही सवाल
क्यूँ न की मैंने बफा।
हुयी गलती मुझसे
उसके लिए मैं मरुँ
तू तो गयी छोड़कर
तेरे बिन कैसे मैं जियूँ।।
तू है मेरे दिन की रौशनी
तुझसे ही है
मेरी रातों का अँधेरा
तू ही है रब मेरा।।।
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